Friday, 27 October 2017

chapter-1 Introduction of Programming Language

Chapter-1
 प्रोग्रामिंग लैंग्वेज
 प्रोग्रामिंग लैंग्वेज
आइये सर्वप्रथम हम जानने की कोशिश करते हे की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या होती है?
कंप्यूटर को इंस्ट्रक्शन देने क लिए कई प्रकार की कंप्यूटर लैंग्वेजेज का उपयोग किया जाता हे जिन्हे कंप्यूटर लैंग्वेज कहते है।
कंप्यूटर में इंस्ट्रक्शन लिखने क लिए कुछ ऐसी भासाओ का उपयोग किया जाता हे जिन्हे कंप्यूटर आसानी से समझ सके।  जिन भाषाओं को कंप्यूटर समझता  हैं उन्हें कंप्यूटर  प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कहते हैं।
अतः "प्रोग्रामिंग भाषा  लिखे गए सिम्बोल का संग्रह होता हैं जिनका उपयोग कंप्यूटर हार्डवेयर को स्पेसिफिक टास्क परफॉर्म करने क लिये निर्देश देना होता हैं।"
जैसे सामान्यतः  होगा की  हिंदी तथा इंग्लिश  लिखने  और पढ़ने क लिए व्याकरण  का उपयोग किया  जाता हैं ठीक उसी प्रकार प्रोग्रामिंग भाषा को लिखने क लिए कुछ  नियम बनाये  गए हैं जिन्हे सिंटेक्स   हैं।साथ ही हर प्रोग्रामिंग  अपनी  वॉक्यूबलरी होती  है।

प्रोग्रामिंग  लैंग्वेज की जनरेशन 


1. फर्स्ट जनरेशन लैंग्वेज 
  
फर्स्ट जनरेशन लैंग्वेज  को मशीन लेवल लैंग्वेज या लौ  लेवल लैंग्वेज  भी कहा जाता  हैं।  इस जनरेशन में ट्रांसलेटर का उपयोग  होता था क्युकी यह  लैंग्वेज  मशीन को इंस्ट्रक्शन देने के लिए  0 तथा  1  का ही  उपयोग करती हैं।  प्रत्येक  अनुसार हर  अलग अलग कोड  जाते हैं इसलिए इस भाषा को "मशीन डिपेंडेंट" भी कहा    जाता हैं।  
फायदे  :-
१. ट्रांसलेटर  उपयोग नहीं किया जाता।  
२. एक्सेक्यूटिव स्पीड भोत  हैं।  
३.  से प्राइमरी  उपयोग करती हैं।  

नुकसान :-
१. मशीन पे निर्भर होने  के  कारण प्रत्येक मशीन की coding अलग होती हैं . 
२. प्रोग्रामर को मशीन द्वारा किये जाने बाले आंतरिक कार्य की समपूर्ण जानकारी होना aavyashak  हैं. । 
३. कोड लिखने में बहुत समय नस्ट होता हैं। 
४. मशीन भाषा में इंस्ट्रक्शन या निर्देश लिखना बहुत कठिन हैं।  
५.जटिल होने क कारन प्रोग्रामरों की कमी रहती हैं . 

2. असेंबली लैंग्वेज
१९४०' में असेंबली लैंग्वेज का निर्माण अमेरिकन naval officer Grace hopper द्वारा किया गया , जिसका प्रमुख उद्द्येश  ENIAC  कंप्यूटर क लिए  FLOW-MATIC language ko प्रदर्शित करना था 
असेंबली लैंग्वेज मशीन लैंग्वेज की तुलना में काफी सरल होती हैं क्युकी इसमें  पूर्ण रूप से बाइनरी नंबर 
(0 तथा  1 ) लिखने की आव्यशकता नहीं होती हैं . इंस्ट्रक्शन लिखने क लिए हमारे पास कई मनमोनिक कोड होते हैं जैसे:-mov ,jmp,etc. इन mnemoonic code को  मशीन की भाषा में बदलने क लिए असेम्बलर को उपयोग किया जाता हैं | 
असेंबली प्रोग्रामिंग में डाटा रजिस्टर क अंदर जाकर स्टोर होता हैं ,और प्रत्येक कंप्यूटर का अपना स्वयं का अपना रजिस्टर सेट होता हैं . अत: असेंबली लैंग्वेज मशीन पर निर्भर होती हैं |
फायदे:-
1. समय काम खर्च होता हैं|
२. मशीनी  भाषा की तुलना में असेंबली भाषा में कार्य करना सरल हैं |
३.कम मेमोरी की अव्यसक्त होती हैं  |
४. टाइम मशीन भाषा क सामान ही फ़ास्ट होता हैं ,क्युकी इसमें बन-बन -ट्रांसलेटर का उपयोग किया जाता हैं|
५. . इंटरप्ट रूटीन तथा मेमोरी क अंदर रहने बाले प्रोग्राम को लिखने क लिए असेंबली भाषा बहुत उपयुक्त हैं 
नुक्सान 
१. मेमोरी लोकेशन क एड्रेस के  लिए कोई सिम्बोल  या नाम नहीं होते हैं , हर एक मेमोरी लोकेशन का एड्रेस याद रखना पढता हैं|
२. कोडिंग  में से एरर करेक्शन करना बहुत मुश्किल कार्य होता हैं |
३. mnemonic कोड को याद रखना मुश्किल होता हैं |
४. भविष्य के  लिए कोडिंग का बिबरण बहुत बिस्तर रूप से लिखना पढता हैं |

3. हाई लेवल लैंग्वे
यह प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की तीसरी पीड़ी हैं|हाई लेवल लैंग्वेज में अस्सेम्ब्ल लैंग्वेज की तरह मशीन आर्किटेक्चर को समज़ने की आव्यशकता  नहीं होती साथ ही इसमें  इंस्ट्रक्शन इंग्लिश शब्दों का उपयोग करके  लिखा जा सकता हैं!जिसके  कारण यह लिखने और समझनेमे  में बहुत सरल होती हैं |हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे हुए प्रोग्राम को मशीन की भाषा में परिबर्तित करने क लिए २ ट्रांसलेटर सॉफ्टवेयर की आव्यशकता  होती हैं जिन्हे, कम्पाइलर और इंटरप्रेटर कहते हैं |
हाई लेवल लैंग्वेज क अंतर्गत अन्य वाली कुछ लैंग्वेज के उदहारण निम्नलिखित हैं:-
1. C लैंग्वेज 
2.फोरट्रान 
3. बेसिक  
4. कोबोल
5. पास्कल 
आदि 



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